छठ पूजा क्यों मनाया जाता है?
छठ पूजा भारत का एक अत्यंत प्राचीन और पवित्र त्योहार है। यह मुख्य रूप से सूर्य देव और छठी मैया (ऊषा/प्रातःकालीन सूर्य की शक्ति) की उपासना के रूप में मनाया जाता है।
1. सूर्य देव के आशीर्वाद के लिए
2. छठी मैया से परिवार की सुख-समृद्धि की कामना
छठी मैया, जिन्हें माता प्रकृति और संतान के स्वास्थ्य की देवी माना जाता है, उनसे संतान की सुरक्षा घर में सुख-शांति और परिवार की उन्नति की प्रार्थना की जाती है।
छठ पूजा में महिलाएँ बहुत लंबा सिंदूर क्यों लगाती है?
छठ पूजा में महिलाएँ बहुत लंबा सिंदूर, यानी माथे से लेकर नाक या कभी-कभी नाक के नीचे तक लगाती हैं। इसके पीछे गहरा धार्मिक और प्रतीकात्मक अर्थ होता है —
पति की लंबी आयु का प्रतीक:
जितना लंबा सिंदूर लगाया जाता है, वह उतनी लंबी पति की आयु और वैवाहिक जीवन की स्थिरता का प्रतीक माना जाता है। इसीलिए महिलाएँ छठ में सामान्य दिनों से कहीं लंबा सिंदूर लगाती हैं।
सौभाग्य और समर्पण का प्रतीक:
छठी मइया और सूर्य देव के प्रति श्रद्धा दिखाने के लिए महिलाएँ पूर्ण श्रृंगार करती हैं। लंबा सिंदूर यह दर्शाता है कि स्त्री पूरी श्रद्धा और समर्पण के साथ अपने परिवार और पति के कल्याण के लिए व्रत कर रही है।
ऊर्जा और आशीर्वाद का संकेत:
लाल सिंदूर को शक्ति, उष्मा और जीवन ऊर्जा का प्रतीक माना गया है। माथे से नाक तक लगाया गया सिंदूर यह दर्शाता है कि नारी अपने शरीर, मन और आत्मा से पूर्णतः इस पूजा में समर्पित है।
लोक परंपरा और आस्था का प्रतीक
लोक बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश और झारखंड की लोक परंपराओं में यह माना जाता है कि छठ के अवसर पर जितना लंबा सिंदूर लगाया जाएगा, उतना ही शुभ फल मिलेगा। यह लोक-श्रद्धा पीढ़ियों से चली आ रही है।
👉 इसलिए छठ पूजा में लंबा सिंदूर लगाना सौभाग्य, आस्था और प्रेम का प्रतीक माना जाता है।



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