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आत्महत्या और उसके कारण(Suicide and its causes)

आत्महत्या

आत्महत्या   दो शब्दों से मिलकर बना है।  sui-अपना,cide- हत्या। आत्महत्या जानबूझकर किसी के खुद का मौत का कारण बनती है ।  हर व्यक्ति के जीवन में यह पड़ाव कहीं न कहीं आ ही जाता है यदि सही सोच और सही दिशा मिल जाए तो वह आगे बढ़ जाता है और ऐसे आत्महत्या जैसे गलत कदम उठाने के लिए बाध्य नहीं होता है।
    आत्महत्या निम्नलिखित प्रकार के हैं-
1. इच्छामृत्यु 
2.विचारशील आत्महत्या
 3.धार्मिक/आध्यात्मिक आत्महत्या 
4.परोपकारी आत्महत्या 
5.डिस्ट्रेस यानी तनाव आत्महत्या।

1.इच्छामृत्यु(Euthenesia)- असाध्य रोग से ग्रस्त व्यक्ति जिसका कोई इलाज नहीं हो सकता है तो मरीज के खुद के इच्छा अनुसार या परिवारजनों के सहमत होने पर  मरीज को मृत्यु दी जा सकती है। उदाहरण- अरुणा शानबाग मामला 27 नवम्बर 1973 – 18 मई 2015  (मुम्बई मे अरुणा रामचंद्र शानबाग, एक भारतीय नर्स थी, जो यौन उत्पीड़न के परिणामस्वरूप  कोमा में 37 साल बिताने के बाद इच्छामृत्यु पर एक अदालत में ध्यान देने के केंद्र में थी।)

2.विचारशील मृत्यु (Thoughtful suicide )- आस्ट्रेलिया तथा स्विजरलैंड मे मृत्यु मांग  के आधार पर  दी जाती है, जिनकी आयु 90 वर्ष हो चुकी है।

3.धार्मिक /आध्यात्मिक आत्महत्या(Religious spiritual suicide)-

 केस 1. दिल्ली के बुराड़ी जगह में एक ही परिवार के  11 लोगों ने सुसाइड कर लिया था।
उनका मानना था कि मृत पिता की आत्मा उनसे बात करती है और उन्होंने ही संदेश दिया कि मृत्यु के बाद जीवन बेहतर होगा। 
उनका मानना था कि मृत पिता की आत्मा उनसे बात करती है और उन्होंने ही संदेश दिया कि मृत्यु के बाद जीवन बेहतर होगा।

केस 2.- 20 साल पहले अमेरिका में एक संप्रदाय के 50 लोगों ने एक ही साथ  सुसाइड कर लिया था। उनका मानना था कि धूमकेतु पृथ्वी के नियरेस्ट पॉइंट से होकर गुजरेगा तो वे लोग स्वर्ग मे चले जाएंगे ।

4.परार्थ वादी / परोपकारी किस्म की आत्महत्या(Altruistic Suicide)
समाज के लिए आत्महत्या करना।
केस- भूकंप आने पर बिल्डिंग गिर जाती है और एक मां अपने बच्चे को बचाने के लिए और मां बच्चे को पेट के नीचे छुपा लेती है और स्पेस देती है ताकि उसे ऑक्सीजन मिल सके। 4 दिन बाद बचाव टीम आई।उन्होंने देखा कि 2 महीना का बच्चा अभी भी जीवित है क्योंकि उस समय मां के मरने के बाद मां की खूून की बूँदे उसके मुंह में जा रही थी। जिससेे बच्चे को पोषण मिल रहा था।
 5. अहंकारी आत्महत्या (Egoistic/Distress ) Suicide-   
 लम्बे समय तक  (2 सप्ता से अधिक) तनाव ग्रस्त व्यक्ति डिप्रेशन का शिकार हो सकता है इसलिए लंबे समय तक तनाव होना हानिकारक होता है।अवसाद में व्यक्ति जिंदा लाश की तरह होता है। कई बार अवसाद जैसी समस्या इतनी भयानक हो जाती है कि वह व्यक्ति सुसाइड जैसे गलत कदमो को उठाने के लिए बाध्य हो जाता है ।
उदाहरण:-
  • कैफे कॉफी डे मालिक वी जी सिद्धार्थ ने की खुदकुशी(जुलाई 2019)

  • सुशांत सिंह राजपूत (21 जनवरी 1986 - 14 जून 2020) एक भारतीय अभिनेता थे। 

सुशांत सिंह राजपूत को 14 जून 2020 को दिन में मुम्बई के बांद्रा के उनके घर में मृत पाया गया। प्राथमिक सूचना के अनुसार उनके निधन का कारण आत्महत्या बताया जा रहा है और बताया जा रहा है कि सुशांत सिंह राजपूत पिछले 6 महीने से अवसाद में थे।

  • अमेरिका की अभिनेत्री मर्लिन मुनरो ने 36 साल की आयु में आत्महत्या कर ली है तो बहुत सारी नींद की गोली खाकर।
  • विजयालक्ष्मी वाडलापति (2 दिसम्बर 1960 - 23 सितम्बर 1996), जिन्हें उनके स्टेज नाम सिल्क स्मिता के नाम से जाना जाता है, भारतीय फिल्म अभिनेत्री थीं, जो मुख्य रूप से दक्षिण भारतीय फिल्मों में काम करती थीं। उनके निधन के कारण आत्महत्या था।


आत्महत्या क्यों?

एक व्यक्ति के  आत्महत्या के कई कारण हो सकते जिसमे अवसाद मुख्य  कारण होता है जैसे-नशा, कानूनी आत्महत्या, स्वास्थ्य, किसी और की मृत्यु सहन न कर पाना, परीक्षा ,प्रतिरक्षा तंत्र अनियंत्रित, वातावरणीय प्रभाव इत्यादि।
कुछ यह कारण भी है अवसाद के जिम्मेदार
आनुवंशिक दोष-अनुवांशिकी दोष कहीं न कहीं दूसरे प्रकार का अवसाद  का कारण बनता है जिसमें कि माता-पिता का जीन प्रभाव डालता है। माना जाता है तीन पीढ़ियों तक जीन प्रभावी रहता है।
वातावरण का प्रभाव
बरसात के मौसम मे जैसे मई के अंतिम सप्ताह से लेकर जून और जुलाई )में ज्यादातर लोगों को अवसाद से ग्रसित होने की संभावना बनती है क्योंकि बरसात के मौसम में जल की बूंदे के वायुमंडल में उपस्थित होती है और वह सूर्य के प्रकाश में गर्म होकर उमस भरी गर्मी को पैदा करती है जिससे लोगो मे चिड़चिड़ापन की भावना आ जाती है और गुस्से मे आकर कुछ न कुछ गलत कर डालते है और भयानक परिस्थितियों में फंस जाने के कारण आत्महत्या के शिकार हो जाते हैं। इसलिए व्यक्ति को तापमान के अनुसार खुद को नियंत्रित रखना चाहिए जैसे अधिक से अधिक पानी पीकर  शरीर के तापमान को नियंत्रित किया जा सकता है।
नकारात्मक माहौल
जैसे कोरोना महामारी दौर में लोगों की आर्थिक स्थिति खराब हो गई है जिसकी वजह से लोग ज्यादा परेशान हो रहे हैं क्योंकि लोगों की बुनियादी जरूरतें पूरी नहीं हो पा रही है।
  वैसे देखा जाए तो अवसाद  के मुख्य दो कारण विचारविचार  और भावनाएं व्यक्ति  के अंदर ही पनपते हैं। व्यक्ति के आसपास का माहौल चाहे जैसा भी हो लेकिन यह व्यक्ति पर निर्भर  करता है कि वह उस माहौल पर सकारात्मक विचार करता है या नकारात्मक विचार।अगर वह सकारात्मक सोचता है तो उसकी भावनाएँ भी सकारात्मक होती हैं और वह जिन्दगी मे आसमान के उँचाइयों को छूता है और  यदि वह नकारात्मक सोचता है तो उसकी भावनाएँ भी नकारात्मक होती हैं और वह व्यक्ति काफी तनाव  में आने लगता है। यही तनाव कई दिनों तक रहने से अवसाद के दलदल में धंसता चला जाता है और सुसाइड जैसे कदम उठाने की संभावना बढ़ जाती है।

टिप्पणियाँ

Prince Kumar ने कहा…
Abhi approval nhi mila hai to domain by kar lijiye

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