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World tuberculosis Day

 विश्व क्षय रोग दिवस: 24 मार्च



प्रतिवर्ष 24 मार्च को विश्व क्षय रोग (टीबी) दिवस इसके विनाशकारी सामाजिक आर्थिक और स्वास्थ्य परिणामों के बारे में जागरूकता फैलाने तथा विश्व स्तर पर टीबी महामारी को समाप्त करने के प्रयास करने हेतु मनाया जाता है। भारत में हर साल टीबी के लाखों मरीज सामने आते हैं। टीबी एक संक्रामक बीमारी है, लेकिन लाइलाज नहीं है। समय रहते इस बीमारी का इलाज करवा लिया जाए तो इसे पूरी तरह से ठीक किया जा सकता है।

                    डॉट्स (DOTS) यानी 'डायरेक्टली ऑब्जर्व्ड ट्रीटमेंट शॉर्ट कोर्स' टीबी के इलाज का अभियान है। - इसमें टीबी की मुफ्त जांच से लेकर मुफ्त इलाज तक शामिल है। - इस अभियान में हेल्थ वर्कर मरीज को अपने सामने दवा देते हैं ताकि मरीज दवा लेना न भूले। - हेल्थ वर्कर मरीज और उसके परिवार की काउंसलिंग भी करते हैं।


क्‍या है इस साल की थीम

विश्‍व तपेदिक दिवस को लेकर हर साल एक थीम निर्धारित की जाती है। साल 2023 की थीम है- यस! वी कैन एंड टीबी! (Yes! We can end TB!) इसका अर्थ है कि हां, हम टीबी का अंत कर सकते हैं। इस थीम के जरिए लोगों को टीबी की बीमारी को जड़ से खत्‍म करने के लिए मोटिवेट करने का प्रयास किया गया है।


विश्व टीबी दिवस और इसका महत्त्व:


  • इस दिन 1882 में डॉ. रॉबर्ट कोच ने एक माइकोबैक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस की खोज की घोषणा की जो टीबी का कारण बनता है और उनकी खोज ने इस बीमारी के निदान और इलाज का रास्ता खोल दिया।
  • विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, हर दिन 4100 से अधिक लोग टीबी से अपनी जान गँवाते हैं और लगभग 28,000 लोग इस बीमारी से ग्रसित होते हैं। एक दशक से अधिक समय में पहली बार 2020 में टीबी से होने वाली मौतों में वृद्धि हुई है।
  • डब्ल्यूएचओ के अनुसार, वर्ष 2020 में लगभग 9,900,000 लोग टीबी के कारण बीमार पड़ गए और लगभग 1,500,000 लोगों की मृत्यु हो गई। वर्ष 2000 से टीबी को समाप्त करने के लिये विश्व स्तर पर किये गए प्रयासों से 66,000,000 लोगों की जान बचाई गई है।
  • दुनिया भर में कुल टीबी मामलों में भारत का हिस्सा लगभग 26% है।
                     इसलिये विश्व टीबी दिवस दुनिया भर के लोगों को टीबी रोग और उसके प्रभाव के बारे में शिक्षित करने के लिये मनाया जाता है।


टीबी मुक्‍त करने का लक्ष्‍य

विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के अनुसार टीबी अभी भी दुनिया की सबसे घातक संक्रामक किलर डिजीज में से एक है। डब्‍ल्‍यूएचओ की तरफ से साल 2030 तक दुनिया को पूरी तरह से टीबी मुक्‍त करने का लक्ष्‍य रखा गया है। वहीं भारत की ओर से 2025 तक देशवासियों की टीबी की बीमारी से पूरी तरह से निजात दिलाने का लक्ष्‍य निर्धारित किया गया है।



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